Siddh Santo Ki Khoj
Babaji (हिमालय के आदित्यवर्ण महान दिव्य योगी पुरुष)
Babaji (हिमालय के आदित्यवर्ण महान दिव्य योगी पुरुष)
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स्वामी सत्येश्वरानन्द महाराज (Swami Satyeswarananda Giri Maharaj) द्वारा रचित "बाबाजी (हिमालय के आदित्यवर्ण महान दिव्य योगी पुरुष)" एक अत्यंत प्रामाणिक और रहस्यमयी आध्यात्मिक ग्रंथ है। यह पुस्तक क्रिया योग (Kriya Yoga) के अमर जन्मदाता महामुनि बाबाजी के जीवन, उनकी दिव्य लीलाओं और हिमालय के शिखरों पर हुए पावन संवादों (संलाप) का एक अनमोल संग्रह है। यदि आप क्रिया योग की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा के गूढ़ रहस्यों को समझना चाहते हैं, तो यह ग्रंथ आपके संग्रह में अवश्य होना चाहिए।
मुख्य आकर्षण और विशेषताएं (Key Features)
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बाबाजी के साथ दिव्य संवाद: इस पुस्तक में अमर योगी महामुनि बाबाजी और उनके परम शिष्यों के बीच हुए वास्तविक आध्यात्मिक संवादों (क्रिया-संलाप) को मूल रूप में लिपिबद्ध किया गया है।
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मानव शरीर और कुरुक्षेत्र का रहस्य: पुस्तक में सुंदर रेखाचित्रों के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस प्रकार मनुष्य का शरीर ही 'साधन क्षेत्र' है और इसके भीतर चक्रों का संतुलन ही 'कुरुक्षेत्र का युद्ध' है।
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दुर्लभ चित्र और प्रामाणिक प्रमाण: इस ग्रंथ में 24 रंगीन (Color) और 50 श्वेत-श्याम (B/W) दुर्लभ चित्र शामिल हैं, जो स्वामी सत्यानन्द महाराज, मौनी ब्रह्मचारी और हिमालय के अन्य सिद्ध संतों के जीवन को दर्शाते हैं।
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कायाकल्प और शरीर परिवर्तन का विज्ञान: अध्याय 12 में कायाकल्प और योग-विज्ञान के माध्यम से शरीर परिवर्तन के दिव्य और प्राकृतिक नियमों की विस्तृत व्याख्या की गई है।
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दैनिक जीवन में क्रिया योग का पालन: गृहस्थ और समाज में रहते हुए एक 'गोपनीय संतुलित जीवन' कैसे जिया जाए और विकारों से कैसे बचा जाए, इस पर बाबाजी का अमूल्य मार्गदर्शन।
पुस्तक की संक्षिप्त विषय-सूची (Brief Overview)
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बाबा का पूर्वाश्रम जीवन: उनके शैशव काल, बाल्यकाल, प्रारंभिक दीक्षा और परमहंस योगानन्द जी व स्वामी कृष्णानन्द जी के आश्रमों से जुड़े संस्मरण।
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कायाकल्प (शरीर परिवर्तन): दुनागिरि, पाण्डुखुली पहाड़ और हिमालय के शिखरों पर योग-विज्ञान के माध्यम से चैतन्य की उच्चतर अवस्था की प्राप्ति।
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मनुष्य शरीर में साधन क्षेत्र: इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना नाड़ी और मूलाधार से लेकर सहस्रार चक्र तक का संपूर्ण वैज्ञानिक विश्लेषण (सटीक चित्र सहित)।
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व्यावहारिक अध्यात्म: विवाह, गृहस्थ जीवन में पवित्रता, गर्भावती माताओं के लिए नाभिक्रिया का उपदेश और आत्म-साक्षात्कार के सूत्र।
Product Specifications
| विशेषता (Attribute) | विवरण (Details) |
| पुस्तक का नाम (Title) | बाबाजी (हिमालय के आदित्यवर्ण महान दिव्य योगी पुरुष) |
| लेखक (Author) | स्वामी सत्येश्वरानन्द महाराज (Swami Satyeswarananda Giri Maharaj) |
| प्रकाशक (Publisher) | द संस्कृत क्लासिक्स (The Sanskrit Classics) |
| भाषा (Language) | हिंदी (Hindi) |
| पृष्ठ संख्या (Pages) | 342 पृष्ठ (24 रंगीन और 50 B/W दुर्लभ चित्रों के साथ) |
| जिल्द (Binding/Cover) | हार्डकवर (Hardcover) |
| आकार (Dimensions) | 23 cm X 16.5 cm (9.0 inch X 6.5 inch) |
| वजन (Weight) | 500 gm |
| उत्पाद की स्थिति (Condition) | नई (Brand New) |
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